“मेरे प्यारे बंगालवासियों…” चुनावी बिगुल या भावनात्मक ब्रांडिंग?

संजीव पॉल
संजीव पॉल

पश्चिम बंगाल में इस साल होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जनता के नाम एक पत्र जारी कर सियासी पारा बढ़ा दिया है। इस पत्र को चुनावी अभियान की soft launch भी माना जा रहा है। खास बात यह रही कि पत्र बंगाली और हिंदी दोनों भाषाओं में जारी किया गया, यानी मैसेज भी लोकल और नैरेटिव भी नेशनल।

पत्र में “एबार भाजपा सरकार” का नारा प्रमुखता से उभरा। यह सिर्फ स्लोगन नहीं, बल्कि एक स्पष्ट राजनीतिक सिग्नल है कि पार्टी इस बार बंगाल की सत्ता पर सीधी दावेदारी कर रही है।

‘सोनार बांग्ला’ और सुरक्षा का एजेंडा

पीएम मोदी ने अपने संदेश में ‘सोनार बांग्ला’ के सपने को दोहराया। उन्होंने लिखा कि जो भी इस स्वर्णिम बंगाल की कल्पना करता है, वह मौजूदा हालात से आहत है। अवैध घुसपैठ और महिलाओं के खिलाफ हिंसा को उन्होंने राज्य के लिए चिंता का विषय बताया।

महिला सुरक्षा को लेकर उन्होंने विशेष जोर दिया और कहा कि “बंगाल की माताएं और बहनें सुरक्षित महसूस नहीं कर रहीं।” यह लाइन सीधे भावनात्मक और सामाजिक दोनों स्तरों पर असर डालने की कोशिश करती दिखती है।

राजनीति में शब्द कभी सिर्फ शब्द नहीं होते, वे narrative का architecture बनाते हैं।

विकास की बात या वोट की बात?

पत्र में केंद्र सरकार की योजनाओं का विस्तार से उल्लेख किया गया। आयुष्मान भारत, पीएम आवास योजना और उज्ज्वला योजना जैसी स्कीमों को उदाहरण बनाकर यह संदेश देने की कोशिश की गई कि “दिल्ली की योजनाएं, सीधे आपके दरवाज़े तक।”

पीएम ने लिखा कि लाखों परिवारों को इन योजनाओं से लाभ मिला है और उनकी जिंदगी आसान हुई है। यानी विकास का ग्राफ सीधे वोट की लाइन से जोड़ने की कोशिश।

निजी संवाद का टच

पत्र में एक भावनात्मक अंश भी था, जिसमें उन्होंने एक परिवार का जिक्र करते हुए लिखा कि अब उनका बेटा स्कूल जा रहा है और हालात सुधर रहे हैं। यह हिस्सा राजनीतिक पत्र से ज्यादा personal outreach जैसा लगा। चुनावी गणित में जब आंकड़े काम न आएं, तो भावनाएं अक्सर पुल का काम करती हैं।

सियासी संकेत साफ

कुल मिलाकर यह पत्र एक बहुस्तरीय राजनीतिक दस्तावेज की तरह है। एक तरफ भावनात्मक अपील। दूसरी तरफ सुरक्षा और अवैध घुसपैठ का मुद्दा। तीसरी तरफ केंद्र की योजनाओं का रिपोर्ट कार्ड। अब सवाल यह है कि बंगाल की जनता इसे विकास का रोडमैप मानेगी या चुनावी रिहर्सल।

चुनावी मौसम में हर शब्द, हर नारा, हर चिट्ठी… एक campaign tool बन जाता है।

Supreme फैसले के बाद 10% Global Tariff का नया वार, भारत भी प्रभावित

Related posts

Leave a Comment